रूस-यूक्रेन युद्ध के पहले दिन दुनिया को कितना हुआ नुकसान

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रूस-यूक्रेन युद्ध की आशंका थी अगर ये युद्ध हुआ तो इसके गंभीर परिणाम पूरी दुनिया को झेलने पड़ेंगे चलिए समझते हैं रूस-यूक्रेन इस युद्ध से दुनिया पर क्या असर पड़ेगा? इस विवाद में भारत का पक्ष क्या है?

रूस-यूक्रेन युद्ध हुआ तो दुनिया पर पड़ेगा क्या असर?

रूस और यूक्रेन के बीच जंग छिड़ने पर इससे न केवल ये दोनों देश प्रभावित होंगे बल्कि पूरी दुनिया पर इसका असर नजर आने की संभावना है दुनिया के कच्चे तेल के उत्पादन में रूस की हिस्सेदारी 13% है यूक्रेन से लड़ाई की सूरत में रूस से कच्चे तेल का उत्पादन और सप्लाई बाधित होगी जिससे दुनिया भर में कच्चे तेल के दाम बढ़ेंगे फरवरी में कच्चे तेल की कीमत 95 डॉलर प्रति बैरल के साथ 2014 के बाद से अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई रूस-यूक्रेन विवाद बढ़ने पर कच्चे तेल की कीमतों के और बढ़ने की आशंका है नेचुरल गैस सप्लाई में रूस की हिस्सेदारी 40% है यूरोप की गैस की सप्लाई का एक तिहाई हिस्सा रूस से आता है जिसमें से ज्यादातर गैस पाइपलाइन यूक्रेन से गुजरती है यूक्रेन के साथ युद्ध की स्थिति में ये सप्लाई चेन प्रभावित होगी इससे यूरोप और बाकी देशों में गैस महंगी होगी दुनिया के अनाज की सप्लाई का एक बड़ा हिस्सा काला सागर से होकर गुजरता है जिसकी सीमा रूस और यूक्रेन दोनों से लगती है रूस और यूक्रेन दुनिया के दो सबसे बड़े गेहूं उत्पादक हैं रूस दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा और यूक्रेन नौवां सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक देश है अगर रूस ने यूक्रेन पर हमला किया तो न केवल अनाज की सप्लाई बल्कि इसके उत्पादन पर भी असर पड़ेगा जिससे दुनिया भर में अनाज की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी हो सकती है

रूस-यूक्रेन विवाद में भारत है किसके साथ?

भारत ने रूस-यूक्रेन विवाद में अब तक किसी भी पक्ष का समर्थन नहीं किया है बल्कि उसने तटस्थ रुख अपना रखा है भारत ने दोनों पक्षों से मामले के शांतिपूर्ण ढंग से निपटारे की अपील की है भारत ने 2014 में रूस के क्रीमिया पर कब्जे के दौरान भी खुलकर रूस का विरोध नहीं किया था यूक्रेन में 18 हजार मेडिकल स्टूडेंट्स समेत 20 हजार भारतीय फंसे हैं जिन्हें सुरक्षित निकालना भारत की प्राथमिकता है

रूस-यूक्रेन विवाद में भारत क्यों नहीं कर रहा रूस का विरोध?

रूस भारत का सबसे बड़ा हथियार सप्लायर है 2020 में भारत ने अपनी कुल हथियार खरीद का करीब 50% रूस से किया था 2018 से 2021 के दौरान महज पिछले तीन सालों में ही भारत-रूस के बीच रक्षा व्यापार 15 अरब डॉलर (1.12 लाख करोड़ रुपए) रहा ऐसे में भारत रूस का विरोध करके अपने सबसे बड़े हथियार सप्लायर को नाराज नहीं कर सकता सोवियत संघ के विघटन के पहले भारत के निर्यात में 10% हिस्सेदारी रूस की थी लेकिन 2020-21 तक ये गिरकर 1% रह गई 2020-21 में भारत के आयात में रूस का हिस्सा 1.4% था 2020 में भारत का रूस के साथ कुल व्यापार 9.31 अरब डॉलर (69.50 हजार करोड़ रुपए) रहा दोनों देशों का लक्ष्य 2025 तक इसे बढ़ाकर 30 अरब डॉलर (2.2 लाख करोड़) करने का है रूस से व्यापार बढ़ाने की कोशिशों में जुटा भारत यूक्रेन या अमेरिका के साथ जाकर इन कोशिशों को पटरी से नहीं उतार सकता है

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Author: rudranews

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