पंतनगर विश्वविद्याल में बनेगा उत्तराखंड का पहला हनी-बी क्लीनिक

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उत्तराखंड के मौन पालकों के लिए अच्छी खबर है जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के कीट विज्ञान विभाग में प्रदेश का पहला हनी-बी क्लीनिक स्थापित होने जा रहा है इसमें मधुमक्खी में लगने वाली बीमारियों और शहद के विभिन्न उत्पादों का परीक्षण एवं प्रमाणीकरण किया जाएगा इसके लिए भारत सरकार के कृषि मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन बोर्ड की ओर से विवि के मधुमक्खी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र को 1.20 करोड़ रुपये की दो परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं

मानव जीवन में मधुमक्खियों का बहुत महत्व है इनके जरिये परागण से अनाज फल फूल आदि का उत्पादन संभव है साथ ही मधुमक्खी पालन से शहद मोम प्रोपोलिस मौनवंश मौनविष परागकण व रायल जैली आदि उत्पाद प्राप्त होते हैं उत्तराखंड में मौन पालक मधुमक्खियों की मुख्यत: एपिस मैलीफेरा व एपिश्रियाना इंडिका प्रजातियों का पालन करते हैं आपको बता दे अभी तक प्रदेश में एक भी हनी क्लीनिक नहीं होने से मधुमक्खियों में लगने वाली बीमारियों की पहचान और उनका निदान नहीं हो पाता है इससे मौन पालकों को इस व्यवसाय में हानि की संभावना बनी रहती है

प्रदेश में कोई प्रमाणीकरण संस्था नहीं होने से उनके उत्पादों के बेहतर होने का प्रमाण पत्र नहीं मिल पाता है इससे उन्हें मौन उत्पादों का बाजार में अच्छा भाव भी नहीं मिल पाता था स्वीकृत परियोजना के परियोजनाधिकारी डॉ. प्रमोद मल्ल सह परियोजनाधिकारी डॉ. जेपी पुरवार व डॉ. रेनू पांडेय ने बताया कि स्वीकृत फंड से कीट विज्ञान विभाग में पहले से संचालित लैब का आधुनिकीकरण किया जाएगा मधुमक्खियों की बीमारियों व मौन उत्पादों के परीक्षण के लिए 88 लाख रुपये लागत का विदेश से आयातित गैस क्रोमैटोग्राफी मास स्पैक्ट्रोमेट्री उपकरण स्थापित किया जाएगा साथ ही 27 लाख रुपये की लागत से डाइग्नोस्टिक लैब का निर्माण कराया जाएगा इसके अलावा ढाई लाख रुपये से हनी-बी पर अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया जाएगा

इसमें देश विदेश के मौन वैज्ञानिकों व प्रदेश के मौन पालकों को आमंत्रित कर प्रदेश में मौन पालन को बढ़ावा दिया जाएगा आपको बता दे मौन पालन के विभिन्न उत्पाद जैसे शहद पराग रॉयल जेली मौन विष प्रोपोलिस मोम आदि की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत बहुत अधिक है एक मौन पालक मधुमक्खी पराग का उत्पादन करके वर्ष भर में लाखों रुपये कमा सकता है पराग को प्रोसेसिंग करके दो हजार रुपये प्रति किलो की दर से बेचा जा सकता है रॉयल जेली की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक लाख रुपये प्रति किलो तक है इसी प्रकार प्रोपोलिस को पांच सौ से एक हजार रुपये प्रति किलो तक बेचा जाता है

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Author: rudranews

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